कोई जीते कोई हारे आम आदमी रोयेगा-:

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!

पहले भी भूखा सोता था,
अब भी भूखा सोएगा..!!

आम आदमी ने करगिल में,
अपनी जान गँवाई है..!!

क्या तुमने किसी नेता की,
अर्थी किसी युद्ध में पाई है..!!

जिसको कोठी कार चाहिए,
वह क्या देश सँजोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

वो ही भ्रष्टाचार्य मिलेगा,
वही ग़रीबी बेकारी..!!

हालत ज्यों की त्यों रहनी है,
क्या करेंगे प्रधानमंत्री सरकारी..!!

एक बहू तो ला न पाया,
बहुमत कैसे ढोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

कुछ गाँवों में जाकर देखो,
बिजली है ना पानी है..!!

है अन्धा कानून यहाँ पर,
और व्यवस्था कानी है..!!

घायल सड़कों के घावों को,
कौन मिनिस्टर धोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

देख देखकर अपनी डिग्री,
नौजवान तो रोता है..!!

प्रजातंत्र में अब शिक्षा का,
मतलब आँसू होता है..!!

आत्महत्या करके आख़िर,
नींद मौत की सोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

इस कलयुग में सच्चाई का,
जो भी शख्स पुजारी है..!!

मानवता आदर्श मानकर,
जिसने उम्र गुज़ारी है..!!

भीख माँग कर ही खाएगा,
या फिर रिक्शा ढोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

इसी तरह से अगर बढे़गी,
महँगायी और बेकारी..!!

तन ढकने को कपड़ों तक,
की हो जाएगी लाचारी..!!

मजबूरी में मुफ़लिस इक दिन,
पहन लंगोटी सोएगा..!!

कोई जीते कोई हारे,
आम आदमी रोएगा..!!!

Comments

Popular posts from this blog

समा जाते है लोग दिल में ऐतबार बन कर..!!

गुज़ारिश