यादों की नगरी
यह फोटो किसी रंगीन शाम का नही, बल्कि बीते हुए उन पलों के झरोखा का है, जिनके झोके आज भी मन को उदास कर देतें हैं। जिससे हम लड़ तो लेते हैं लेकिन उसका दर्द इन कोमल आंखों से छलक आता है। ज़रा सोचो हम अपने एक एक लम्हें पीछे छोडते जाते हैं, जिसने हमें रुलाया भी और हंसाया भी। और कुछ लम्हें वो भी हैं जो आज भी चंचल मन को कुरेद देते हैं। इन यादों के पीछे राज भी है, हर दिशाओं में रंग भी और तो और यहां एक दूसरे के लिए प्रीत भी है। लेकिन यह सब होते हुए भी वह पल आंखों के सामने आने लगता है। न जाने क्यूं उस पल सब कुछ भूल जाता है, याद रहता है वह चेहरा जो कभी इन्ही आंखों के सामने हुआ करता था। वो आज भी है, खुश ही नही बहुत खुश है और ईश्वर से प्रार्थना भी है, जहां भी उनके पैर जाए खुशियों की सौगात लाएं।
लेकिन वो दिन हमें याद रहेगा। जब अपने एक-एक मित्रों से खुद को बिछड़ता देखा। हृदय में खुशी थी पर चेहरे पर उदासी भी। खुशी इसलिए की मेरी नई जगह प्रगति की सीढ़ी थी और दुःख का कारण ये था कि साथ रहने वाले दोस्त अलग हो रहे थे। खुद को बहुत रोका तब उदास चेहरे पर मुस्कान आ पाईं, फिर भी वो चेहरा नही देख सका जो हमेशा आंखों के सामने होता था। शायद इसलिए की अगर देखता तो ये कोमल आंखे खुद को रोक न पाती। चेहरे पर मुस्कान और हृदय में खुशी लिए हाथ को आगे बढाया और शुभकामनाओं के साथ विदा हुआ । पर कभी-कभी अपने आप पर गुस्सा भी आता है। किन्ही कारणवश अपने संस्कारों को नही पेश कर पाया। लेकिन मेरे प्यारे दोस्तों के वो मृदुल शब्द आज भी कानों में गूंजते हैं, ‘‘दोस्तो.... अपना ख्याल रखना’’
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