समा जाते है लोग दिल में ऐतबार बन कर..!!
समा जाते है लोग दिल में ऐतबार बनकर, फिर लूट लेते है ख़ज़ाना पहरेदार बनकर..!! यकीं करता है इन्सान जिनपे हद से ज्यादा, डुबों देते है वही कश्ती मझदार बनकर..!! रिश्तों की अहमियत खूब समझती है दुनिया, पर लालच आ जाती है बीच में दिवार बनकर..!! दौरे-मुश्किल में वसूलों पे चलते है बहूत लोग, पर भूला देते है वसूलों को मालदार बनकर..!! झूठ बिक जाता है पलभर में हजारों के बीच, सच रह जाता है तन्हा गुनाहगार बनकर..!! इंसानियत हो गयी हैं गूंगी,मजहब के नारों से, लोग,खुदा को बाटते है,धर्म का ठेकेदार बनकर..!!
बहुत खूब नयी शुरुआत |
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteफैसला अफजाई के लिए बहोत बहोत धन्यवाद
ReplyDeleteबहुत खूब नयी शुरुआत सुन्दर लिखा है बधाई भाई शादाब जी
ReplyDelete...ब्लॉगजगत में मैं संजय भास्कर आपका स्वागत करता हूँ !
संजय भास्कर
http://sanjaybhaskar.blogspot.in
सर आपको बहोत बहोत धन्यवाद
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